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Friday, June 29, 2012
मैं और मेरे रूममेट्स
मैं और मेरे रूममेट्स
अक्सर यह बातें करते हैं...
घर साफ़ होता तो कैसा होता
मैं किचन साफ़ करता,तुम बाथरूम धोते
मैं हॉल साफ़ करता, तुम बालकनी देखते
लोग इस बात पे हैरान होते
और उस बात पे हँसते....
मैं और मेरे रूममेट्स ,
अक्सर यह बातें करते हैं !!!
यह हरा भरा सींक है
या बर्तनों की जंग छिड़ी हुई है
यह कलरफ़ुल किचन है
या मसालों से होली खेली है
है फ़र्श की नयी डिज़ाइन
या दूध, बीयर से धुली हुई हैं
यह सेलफ़ोन है या ढक्कन,
स्लीपींग बैग या किसीका आँचल,
ये एयरफ़्रेशनर का नया फ़्लैवर है,
या कचरे के डब्बे से आती बदबू
यह पत्तियों की है सरसराहत
की हीटर फ़िर से खराब हुआ है
यह सोचता हैं रूममेट कब से गुम सुम -
के जब के उसको भी यह खबर है
के मच्छर नही है, कहीं नही है
मगर उसका दिल है कि कह रहा है
मच्छर यहीं है, यहीं कहीं है !
तोंद की ये हालत, मेरी भी है, उसकी भी,
दिल में एक तस्वीर इधर भी है, उधर भी !!!
करने को बहुत कुछ है मगर कब करें हम
कब तक यूं ही इस तरह रहें हम
दिल कहता है सेफ़वे से कोई वेक्युम क्लीनर ला दे
ये कारपेट जो जीने को जुझ रहा है, फ़िकवा दे
हम साफ़ रह सकते है, लोगों को बता दें,
हाँ हम रूममेट्स है - रूममेट्स है - रूममेट्स है
अब दिल मैं यही बात, इधर भी है उधर भी......
सब को बता दें.........
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अक्सर यह बातें करते हैं...
घर साफ़ होता तो कैसा होता
मैं किचन साफ़ करता,तुम बाथरूम धोते
मैं हॉल साफ़ करता, तुम बालकनी देखते
लोग इस बात पे हैरान होते
और उस बात पे हँसते....
मैं और मेरे रूममेट्स ,
अक्सर यह बातें करते हैं !!!
यह हरा भरा सींक है
या बर्तनों की जंग छिड़ी हुई है
यह कलरफ़ुल किचन है
या मसालों से होली खेली है
है फ़र्श की नयी डिज़ाइन
या दूध, बीयर से धुली हुई हैं
यह सेलफ़ोन है या ढक्कन,
स्लीपींग बैग या किसीका आँचल,
ये एयरफ़्रेशनर का नया फ़्लैवर है,
या कचरे के डब्बे से आती बदबू
यह पत्तियों की है सरसराहत
की हीटर फ़िर से खराब हुआ है
यह सोचता हैं रूममेट कब से गुम सुम -
के जब के उसको भी यह खबर है
के मच्छर नही है, कहीं नही है
मगर उसका दिल है कि कह रहा है
मच्छर यहीं है, यहीं कहीं है !
तोंद की ये हालत, मेरी भी है, उसकी भी,
दिल में एक तस्वीर इधर भी है, उधर भी !!!
करने को बहुत कुछ है मगर कब करें हम
कब तक यूं ही इस तरह रहें हम
दिल कहता है सेफ़वे से कोई वेक्युम क्लीनर ला दे
ये कारपेट जो जीने को जुझ रहा है, फ़िकवा दे
हम साफ़ रह सकते है, लोगों को बता दें,
हाँ हम रूममेट्स है - रूममेट्स है - रूममेट्स है
अब दिल मैं यही बात, इधर भी है उधर भी......
सब को बता दें.........
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चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं...
एक एरिया में भाई रहता है, चमन भाई.. अब उसके एरिया में जो भी लफ़ड़ा होता है तो पुलिस से पहले चमन भाई की अदालत में जाता है.
एक बार चमन भाई के एरिया में रेप हो जाता है और जिस ने काम बजाया होता है उसको पकड़ के चमन भाई के पास लेके जाते है. चमन भाई पहले तो बहुत शान्ति से स्टाईल में उससे बात करते है वो कुछ इस तरह से है.
चमन: क्या रे तेरे को मालूम नहीं ये अपुन का एरिया है??
मुजरीम: हाँ मालूम है ना भाई.
चमन: फ़िर कैसे हिम्मत किया रेप की मेरे एरिया मे?
मुजरीम: अब क्या बोलु भाई किस्मत खराब थी.
चमन: चल मेरे को सब सच सच बता क्या और कैसे हुवा
मुजरीम: अभी क्या ना इधर नाके पे अपुन पान खाने के लिये आया
चमन: फ़िर..
मुर्जिम: अपुन खड़े होके पान खारेला था और उतने में सामने वाली बिल्डींग पे अपुन की नज़र गई.
चमन: आगे बोल
मुजरीम: उधर तीसरी माले पे एक चिकनी खड़ी हुए थी
चमन: फ़िर क्या हुवा
मुजरीम: अपुन को ऐसा लगा के उसने इशारा किया आने के लिये
चमन: फ़िर तुने क्या किया
मुजरीम: अपुन सोचा के कुछ काम होएंगा उसको. अपुन बिल्डींग के नीचे गया
चमन: फ़िर
मुजरीम: उसने इशारे से अपुन को उपर बोलाया.. अपुन सिड़ी चड़ते हुए सोच रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: चल फ़टा फ़ट आगे बोल
मुजरीम: अपुन ने उसको जाके बोला क्या काम है? काईको इशारा किया अपुन को?
चमन: फ़िर
मुजरीम: फ़िर क्या भाई अपुन को उसने घर में अन्दर खींच लिया
चमन: फ़िर
मुजरीम: अपुन घर में तो चला गया लेकिन सोच रहा था के चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: आगे बोल
मुजरीम: उसने अपुन का हाथ पकड़ लिया
चमन: अच्छा?
मुजरीम: सच्छी बोलता है भाई हाथ पकड़ते ही अपुन फ़िर सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : फ़िर क्या हुवा
मुजरीम: फ़िर क्या था उसने बोला चिकने मेरी प्यास बुझा दे
चमन: फ़िर तु क्या बोला (जोश में आकर)
मुजरीम: अपुन क्या बोलता? उसने अप्ना दुपट्टा नीचे गिरा दिया
चमन: तो क्या हुवा..
मुजरीम: अपुन के दिमाग की ढाइ हो गई क्या बॉडी थी साली की... लेकिन भाई फ़िर भी अपुन सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: फ़िर तुने क्या किया
मुजरीम: अपुन बोला एकाद किस करेगा और चला जायेगा. बोले तो बॉडी काम करेंगा लेकिन इन्जन नहीं खोलने का
चमन: तो फ़िर
मुजरीम: उसने अपुन को खीच लिया सच्ची बोला है भाई ऐसी कातिल जवानी अपुन अक्खी लाइफ़ में नहीं देखा
चमन: हाँ वो तो है तो आगे बोल (गर्म होते हुए)
मुजरीम: फ़िर क्या था अपुन ने किस किया, लेकिन इमान से बोलता है सोच रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : आगे बोल
मुजरीम: फ़िर उसने अपनी कमीज़ उतार दी
चमन: फ़िर
मुजरीम : फ़िर सलवार. लेकिन अपुन के दिल में एक ही खयाल आ रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: आगे आगे
मुजरीम: फ़िर बिलाउस और चड्डी साली ने सब उतार दी
चमन : सही में. फ़िर
मुजरीम: फ़िर मेरी पेन्ट खीच ली
चमन : अच्छा. फ़िर फ़िर
मुजरीम: मेरी अंडरवीयर में हाथ डाल दिया
चमन: ओह! फ़िर, फ़िर, फ़िर
मुजरीम: चड्डी उतार दी मेरी लेकिन अपुन फ़िर भी सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : (गुस्सा होते हुए) अरे चमन गया माँ चुदाने तु आगे बोल.
मुजरीम : यही सोच के तो मैने रेप कर डाला.
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एक बार चमन भाई के एरिया में रेप हो जाता है और जिस ने काम बजाया होता है उसको पकड़ के चमन भाई के पास लेके जाते है. चमन भाई पहले तो बहुत शान्ति से स्टाईल में उससे बात करते है वो कुछ इस तरह से है.
चमन: क्या रे तेरे को मालूम नहीं ये अपुन का एरिया है??
मुजरीम: हाँ मालूम है ना भाई.
चमन: फ़िर कैसे हिम्मत किया रेप की मेरे एरिया मे?
मुजरीम: अब क्या बोलु भाई किस्मत खराब थी.
चमन: चल मेरे को सब सच सच बता क्या और कैसे हुवा
मुजरीम: अभी क्या ना इधर नाके पे अपुन पान खाने के लिये आया
चमन: फ़िर..
मुर्जिम: अपुन खड़े होके पान खारेला था और उतने में सामने वाली बिल्डींग पे अपुन की नज़र गई.
चमन: आगे बोल
मुजरीम: उधर तीसरी माले पे एक चिकनी खड़ी हुए थी
चमन: फ़िर क्या हुवा
मुजरीम: अपुन को ऐसा लगा के उसने इशारा किया आने के लिये
चमन: फ़िर तुने क्या किया
मुजरीम: अपुन सोचा के कुछ काम होएंगा उसको. अपुन बिल्डींग के नीचे गया
चमन: फ़िर
मुजरीम: उसने इशारे से अपुन को उपर बोलाया.. अपुन सिड़ी चड़ते हुए सोच रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: चल फ़टा फ़ट आगे बोल
मुजरीम: अपुन ने उसको जाके बोला क्या काम है? काईको इशारा किया अपुन को?
चमन: फ़िर
मुजरीम: फ़िर क्या भाई अपुन को उसने घर में अन्दर खींच लिया
चमन: फ़िर
मुजरीम: अपुन घर में तो चला गया लेकिन सोच रहा था के चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: आगे बोल
मुजरीम: उसने अपुन का हाथ पकड़ लिया
चमन: अच्छा?
मुजरीम: सच्छी बोलता है भाई हाथ पकड़ते ही अपुन फ़िर सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : फ़िर क्या हुवा
मुजरीम: फ़िर क्या था उसने बोला चिकने मेरी प्यास बुझा दे
चमन: फ़िर तु क्या बोला (जोश में आकर)
मुजरीम: अपुन क्या बोलता? उसने अप्ना दुपट्टा नीचे गिरा दिया
चमन: तो क्या हुवा..
मुजरीम: अपुन के दिमाग की ढाइ हो गई क्या बॉडी थी साली की... लेकिन भाई फ़िर भी अपुन सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: फ़िर तुने क्या किया
मुजरीम: अपुन बोला एकाद किस करेगा और चला जायेगा. बोले तो बॉडी काम करेंगा लेकिन इन्जन नहीं खोलने का
चमन: तो फ़िर
मुजरीम: उसने अपुन को खीच लिया सच्ची बोला है भाई ऐसी कातिल जवानी अपुन अक्खी लाइफ़ में नहीं देखा
चमन: हाँ वो तो है तो आगे बोल (गर्म होते हुए)
मुजरीम: फ़िर क्या था अपुन ने किस किया, लेकिन इमान से बोलता है सोच रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : आगे बोल
मुजरीम: फ़िर उसने अपनी कमीज़ उतार दी
चमन: फ़िर
मुजरीम : फ़िर सलवार. लेकिन अपुन के दिल में एक ही खयाल आ रहा था चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन: आगे आगे
मुजरीम: फ़िर बिलाउस और चड्डी साली ने सब उतार दी
चमन : सही में. फ़िर
मुजरीम: फ़िर मेरी पेन्ट खीच ली
चमन : अच्छा. फ़िर फ़िर
मुजरीम: मेरी अंडरवीयर में हाथ डाल दिया
चमन: ओह! फ़िर, फ़िर, फ़िर
मुजरीम: चड्डी उतार दी मेरी लेकिन अपुन फ़िर भी सोचा चमन भाई का एरिया है लफ़ड़ा नहीं करने का
चमन : (गुस्सा होते हुए) अरे चमन गया माँ चुदाने तु आगे बोल.
मुजरीम : यही सोच के तो मैने रेप कर डाला.
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